जीमो-जीमो द्‍वारकानाथ

जीमो जीमो द्‍वारकानाथ कटोरो ल्याइ दूद को भर्यो।

दादो म्हानै धीरै-धीरै बुलावै जद म्हूं आई चाल

जरसी गाइ को दूद तपार म्हूं ल्याइ मसरी डालै

थां कस्यां रूस्या म्हांरा मदनगोपाल कटोरो ल्याइ दूद को भर्यो

यो तो म्हारो कोइनै मदनगोपाल कटोरो ल्याइ दूद को भर्यो

सांवरिया ले चल पैली पार

दूर खड़ा कांई-कांई सोचर्या छो, ओ सांवरिया भगवान।

सांवरिया ले चल पैली पार, कन्ईया ले चल पैली पार…(2)

ज्हां बराजै राधा राणी अलबेली सरकार

सांवरिया ले चल पैली पार कन्ईया ले चल पैली पार…(2)

गुण अवगुण सारा थारै अरपण

पाप पुण्य सब थारै अरपण

छम छम चमकै बणजारा रै

छम छम चमकै चुंदड़ी बणजारा रै…(2)

कोइ थोड़ो सो, कोइ थोड़ो सो म्हारै लारां नाच रै बणजारा रै…(2)

छम छम चमकै चुंदड़ी बणजारा रै…(2)

कोइ थोड़ो सो, कोइ थोड़ो सो म्हारै लारां नाच रै बणजारा रै…(2)

म्हारो साईबारो म्हारो पीऊजी रो रूमाल रंगदै रूमाल रै बणजारा रै…(2)

भाईजी म्हूं छोटी सूं बड़ी कस्यां होगी

एक बेटी ऊंका भाईजी सूं खैरी छै क, भाईजी म्हूं फोरी सूं लोठी कस्यां होगी।

भाईजी म्हूं छोटी सूं बड़ी कस्यां होगी ,भाईजी की आख्यां म मांई की हाता।

म थोड़ा दन ओर रैती तो कांई बगड़ जातो।

भाईजी म्हूं फोरी सूं लोठी कस्यां होगी…….(2)

ग्यो ऊ बचपणो ग्यो ऊ सपणो…

बिदाई

बाप को यो घर बणा थोड़ा दन को ठखाणो छै…(2)

बणरै एक दन थारै तांई पिया घरै जाणो छै…(2)

बाप को यो घर गोरी थोड़ा दन को ठखाणो छै(2)

बाप थारा बाग की वा डाळ छू रे.… (2)

छोड थारा बाग मारैतांइ घरै पिया को सजाणो छै

कसी चक्की को आटो खायो ब्याण मोटी होगी

अजी ब्याण जी कसी चक्की को आटो खार्याओ थांकै कांई लेणो देणो छै, म्हनै बी थांकी नाइ गोळमटोळ होणो छै ओ म्हारी नाइ गोळ मटोळ होर किनै बतावगा।

ओ ब्याण म्हारी ओ ब्याण म्हारी ओ पन्ना

आटो कसी चक्की को खावै ब्याण मोटी होगी (2)

ब्याण मोटी होगी रै ब्याण जाढी होगी (2)

एक डोली चली एक अरथी चली

या बात ऊ टैम की छै जि टैम एक ज्याग सूं पिया सूं मलबा क तांई डोली ऊठै छै ऊंई टैम दूसरी ज्याग सूं लोग सूं बिछड़ र डोली ऊठै छै वा दोन्या को मलबो गेला म एक चोराया प होजावै छै। तो डोली न अरथी क तांई देख्यो अर अरथी न डोली क तांई देख्यो डोली न अरथी सूं खी क बणा या थनै बड़्‍या

म्हू तो मेळा म जाया इ रै

म्हूं  तो मेळा म जाया इ रै ढोलै रै चक्करी म गुम्या रै (2)

चक्करी म जुल्याइ म्हूं तो ढोलर म जुल्याई

चाट पुड़ी खाई म्हानै फोटु भी खिचवाइ म्हूं तो चरकस भी देख्याइ रै

ढोलै रै चक्करी म गुम्या रै (2)

म्हूं तो मेळा म जाया इ रै ढोलै रै चक्करी म जुल्याइ रै

मांत पिता सूं दगा करे

मांत पिता सूं दगा करै व्ह सात जनम तक पछतावैगो

जिते जि दुख पावैगो मर्या नरक म जावैगो(2)

अर पैली जनम बण्यो कागलो कांऊ-कांऊ करतो फरतो

गन्दी नाळी चोंच मांर्यो फरतो किड़ा-मकोड़ा चुगतो फरतो

काळ को लाग्यो झटको ऊल्टो तु मरजावैगो

आगी सावण की रमजोळ

अर झुला जुलन रे बनवारी आगी सावण की रमझोळ झूला जुलै रे बनवारी

सावण की रमझोळ जुलण की रमझोळ झुला-झुला...............

अर सावण की रमझोळ, जुलण की रमझोळ ये......................

दादर मोर पपीया बोलै कोयलड़ी को सोर मोहन कोयलड़ी को सोर