बाप को यो घर बणा थोड़ा दन को ठखाणो छै…(2)
बणरै एक दन थारै तांई पिया घरै जाणो छै…(2)
बाप को यो घर गोरी थोड़ा दन को ठखाणो छै(2)
बाप थारा बाग की वा डाळ छू रे.… (2)
छोड थारा बाग मारैतांइ घरै पिया को सजाणो छै
कस्यां छोडै थारा बाग मारैतांइ घरै पिया को सजाणो छै
छोरी घर बाप की दुसरा की अमानत छै
दस्तुर दुनिया का आपण सबनै नभाभो छै…(2)
बाप को यो घर बणा, थोड़ा दन को ठखाणो छै…(2)
मांई थारा परेम की म्हूं कसी बेटी री
थनै मारतांई जन्म द्यो, थारो घर परायो छै…(2)
मांई प कांई बितै री बणा, तू कांई जाणै
कळेजा का टुकड़ा को रो-रो क बिसरणो छै…(2)
बाप को यो घर बणा, थोड़ा दन को ठखाणो छै…(2)
भाई थारा आंगणा की म्हूं छूं असी चड़ी रै
रात भर बसेरो छै, तड़कै उड जाणो छै…(2)
- तरक माण्डो