मैन्त की ताकत
कोइ देस म एक सेठ रै छो। वांकै गोडै घणो पीसो छो। ऊंकै गोडै घणी बडी ज्याग घणी जमीं-जायदाद अर ऊंको बडो परवार छो। पण एक मसीबत छी ऊ सेठ न नीन्द नावछी, कदी-कदी थोड़ी झमक लाग जावछी। अर घणा खोटा सपणा आवैछा। सेठ घणी चन्ता म रैछो। उनै ऊंको घणो अलाज करायो। पण ऊंको रोग घटबा की बजाय बढतो ही जार्यो छो। एक दन ऊ
- ओर बांचो
- तरक माण्डो