हाडोती ख्यांण्या

मैन्त की ताकत

कोइ देस म एक सेठ रै छो। वांकै गोडै घणो पीसो छो। ऊंकै गोडै घणी बडी ज्याग घणी जमीं-जायदाद अर ऊंको बडो परवार छो। पण एक मसीबत छी ऊ सेठ न नीन्द नावछी, कदी-कदी थोड़ी झमक लाग जावछी। अर घणा खोटा सपणा आवैछा। सेठ घणी चन्ता म रैछो। उनै ऊंको घणो अलाज करायो। पण ऊंको रोग घटबा की बजाय बढतो ही जार्यो छो। एक दन ऊ

पटैल की च्यार ब्‍वां

एक गांऊ म एक पटैल जी रै छा। वांकै च्यार बेटा छा। च्यांरू को ब्याव होर्यो छो। एक दन पटैल जी न की जावो ब्वांवो आपणा माळ म जावो। अर चणा न नीन्‍दर आवो। च्यारु ब्‍वां माळ म चलगी। ब्वां न सोची ये चणा तो काटणी बी आपण न ई पड़ैगा। तो आपण तो अबार सूं ई काटबा लाग जावां। सब क आसै आगी। व्ह काल सूं ई चणा काटबा

नार अर स्वाळयो

एक जंगळ म एक नार अर स्वाळ्यो रै छो। एक दन स्वाळ्यो अर ऊंका छोरा-छोरी जंगळ म जार्या छा। पण वांई रैबा क लेकै ठाम न्ह मली वो फरता-फरता एक नार की गुपा म घुसग्या। पण वांइ याद छी क नार आऊगो तो कांई करंगा। वानै एक तरकीब बणाई। स्वाळ्या न खी स्वाळी सूं क ज्यूई नार आऊगो तो म्हूं थसूं कूंगु क ये छोरा-छोरी क

नार अर राजो

एक बार एक टैम की बात छै। एक गांऊ म एक नार बार-बार आवै छो। ऊ गांऊ म छोको हलर्यो छो। उनै छोको आतंक मचा मैल्यो छो। छोटा मोटा टाबरां न अर मनख्‍यां न तगात खाजाव छो। ज्‍यानबरां न नतकेइ खाऊ छो। गांऊ म छोको हलबलो मचा राख्यो छो। सन्दा गांऊ का उसूं ताणर दुखी होग्या छा। एक दन गांऊ बस्ती का भेळा होया। अर बात

नाण अर पण्डतजी

एक बार एक पटैल जी छा। पटैल जी न वांकी छोरी को ब्याव माण्ड्‍यो। अब ब्याव माण्‍डताई कांई कै छै। छोरा का आडी सूं जान आगी। लोग-बाग जान को स्वागत करबा क तांई बड्‍या नमट्‍या पावणा पीर आग्या। लोग-बाग जीम जामर नमटग्या। अब फेरा की ठाम प नाया की बा न लिपा-पोती करी पण उनै एक पोल म हात सूं लिप्यो-पोत्यो करबो

धरम कम न्ह होणी छाव छै

एक राजो रात म घणी नीन्‍द म ऊंका मैल म सोर्यो छो। उनै सपणा म देख्‍यो की ऊंका राज मैल मसूं एक देवतो खडैर जार्यो छो। ऊंकै पाछै सूं तीन देव्या बी जारी छी। सपणा म राजा न देवता सूं पूंछी थां कुण छै। अर थांक पाछै ये तीन देव्यां कुण छै। अर थां यांसूं क्‍हां जार्या छै। अर यांसूं जाबा को कांई कारण छै। देवत

गदो अर नार

एक बार की बात छै। एक गांऊ म एक गदो अर एक नार रै छो। एक दन गदो तो चारो चरर्यो छो। तो गदा कतांई चरता-चरता नरोक टैम होग्यो छो। गदो धापग्यो छो। ऊंटी ऊ गेला मसूं नार आयो। नार न कदी बी गदो न्ह देख्‍यो छो। नार ज्‍यूंई गदा क गोडै आयो अर खाबा क काण तो उनै देख्यो क आपण तो जंगळ का राजा छां। पण आपण ईसूं छोटा

सन्दा डील को आदी

एक बार कड़ाका की ठण्ड म एक गरीब मनख ऊबाणा पगा सूं डील का लत्‍ता पैन्या होयो, कोइ गेला प कुसी सूं गातो जार्यो छो

होसलो

पराणी मलक की बात छै। एक गांऊ म एक गदो रै छो। ऊको मालिक गदा प माल लादर ले जावै छो। अर गोडै का बजार म लेजार बेचै छो। एक बार एक गदो अपणी पीठ प लकड़्‍या की मोळी धरैर बजार क आडी जार्यो छो। जद ऊ एक दळ-दळ कतांई पार करर्यो छो। तो दळ-दळ म एक मै

सला देबा सूं पैली अपणी रक्सा

एक बार उकाब न एक खड़गोस्या को पीछो कर्यो। खड़गोस आडो टेडो भाग्यो। कस्या न कस्या झाड़्‍या म जार छपग्यो। अर ऊंकी ज्यान बचगी। ऊंको काळज्यो हालतांई धड़कर्यो छो। ऊ हालतो संभळ ई र्यो छो। जद उनै एक गोरया चड़ी कतांई सुण्यो