एक जंगळ म एक नार अर स्वाळ्यो रै छो। एक दन स्वाळ्यो अर ऊंका छोरा-छोरी जंगळ म जार्या छा। पण वांई रैबा क लेकै ठाम न्ह मली वो फरता-फरता एक नार की गुपा म घुसग्या। पण वांइ याद छी क नार आऊगो तो कांई करंगा। वानै एक तरकीब बणाई। स्वाळ्या न खी स्वाळी सूं क ज्यूई नार आऊगो तो म्हूं थसूं कूंगु क ये छोरा-छोरी कांई मांगै छै तूं खीज्ये क जीवता नार को काळ्ज्यो स्वाळी न्ह खी ठीक छै। अर अतनाक म थोड़ी टैम पाछै ई नार आग्यो। तो स्वाळ्यो रूंकड़ा क अदर्यास बैठग्यो। नार आतांई स्वाळ्या न खी स्वाळी सूं ये छोरा-छोरी कांई मांगर्या छै। स्वाळी न की जीवता नार को काळज्यो। अस्या सूणताई नार न वांसूं टाप लगादी। नार न दो च्यार नार सूं या बात बताई तो नार न खी म्हांई लेर चाल देखां अस्यो कुण अपरबळी आग्यो थारी गुफा म। स्वाळ्या ई याद छी क फेर आवगा तो उनै उस्यांई करी स्वाळी समजादी। थोड़ी टैम बाद पाछा नार आया तो स्वाळ्या न उस्यांई खी तो सन्दा नार घबराग्या अर भाग्या। ऊ नार बी वांकै पाछै सूं ई भाग्यो। फेर ऊ नार न पाछी पंचायत बलाई तो सन्दा नार न पली ऊंई मारबा की बात करी ज्यो अदर्यास म बैठ्‍यो छै। सन्दा नार वां चलग्या। पण वामै एक बान्डी पूंछ को नार छो-तो उपै एक क उपर एक चढ़ग्या पण पिनै ई पिन बाण्डी पूंछ को रैग्यो। अब स्वाळ्यो घबराग्यो अब तो मरंगा स्वाळ्या न स्वाळी सूं खी जोर सूं ला राण्ड खाण्डो पिनै को जा मारूं बाण्‍डो अस्यां कैतांई पिनै को नार बाण्डी पूंछ को खडैर भाग्यो, जि पैली सन्दा ई नार पड़ग्या। अर ऊठर-ऊठर भाग्या उकै पाछै कदीबी नार वां नायो। अर स्वाळ्यो ऊंकी लुगाई अर छोरा-छोरी ऊ गुफा म साता सूं रैबा लागग्यो। उकै पाछै दोबारा कोइ नार वां नायो।