अर झुला जुलन रे बनवारी आगी सावण की रमझोळ झूला जुलै रे बनवारी
सावण की रमझोळ जुलण की रमझोळ झुला-झुला...............
अर सावण की रमझोळ, जुलण की रमझोळ ये......................
दादर मोर पपीया बोलै कोयलड़ी को सोर मोहन कोयलड़ी को सोर
अर डाळ डाळ प पंछी बोलै मीठा-मीठा बोलर्या मोर अर झुला झुला
अर झुला झुलन रे सावरियो आगी सावण की रमझोळ झुलअ छै नन्दलालो
आगी सावण की रमझोळ आगी झुलण की रमझोळ झुला झुला येये
एक बगल म बरज की गोप्यां एक मरै राधा प्यारी…………2
सब सखियां क साथ म झुलो झुलरी या बनवारी झुला झुला अर झुला झुला
अर झुला झुलन रे सावरियों आगी सावण की रमझोळ
आगी सावण की रमझोळ आगी झुलण की रमझोळ झुला झुला
सात सखीया मलै झुलो झुलै व्ह बागा क मांई मोहन व्ह बागा क मांई……2
झुको थां झुलाबा लाग्या प्यारा-प्यारा करसन कनाई झुला झुला........
अर झुला जुलन रे नन्दलालो आगी सावण की रमझोळ झुला झुलै रे बनवारी
सावण की रमझोळ जुलण की रमझोळ झुला झुला...............
- तरक माण्डो