या बात ऊ टैम की छै जि टैम एक ज्याग सूं पिया सूं मलबा क तांई डोली ऊठै छै ऊंई टैम दूसरी ज्याग सूं लोग सूं बिछड़ र डोली ऊठै छै वा दोन्या को मलबो गेला म एक चोराया प होजावै छै। तो डोली न अरथी क तांई देख्यो अर अरथी न डोली क तांई देख्यो डोली न अरथी सूं खी क बणा या थनै बड़्या न्ह करी म्हूं तो बड़्या करबा जारी छी थनै म्हांरा गेला म आकर म्हांरा बड़्या काम क तांई बरो काम म बदल द्यो। अस्या सूणतांई अरथी खैबा लागी क अस्या बड़ा बोल मत बोलै थारैतांई याद कोइनै ज्यां आबाणु म्हूं जारि छूं। काल थारैतांई बी वांइ आणो छै अर तू थारैतांई बडी समजै छै तू सुण थमै अर म्हमै कांई फरक कोइनै तो सुण अरथी न डोली सूं खी।
च्यार थमै लाग्या च्यार म्हमै लाग्या फूल थपै चढ्या फूल म प चढ्या
डोली खबा लागी क च्यार थारा प लाग्या च्यार म्हारा प लाग्या फूल थप चढया
फूल मप चढ्या जब वानै कोई फरक न जाण्यो तो तू कस्यां फरक समझरी छै
च्यार थमै लाग्या, च्यार म्हमै लाग्या
फूल थपै चढ्या फूल म प चढ्या सखी फरक
अतनो छै भाईली तू छोड क चाली, अर म्हूं बिछड़ क चाली…(2)
चुड़ी थारी हरी, चुड़ी म्हारी हरी मांग दोन्यां की सिन्दुर सूं भरी
अरथी बोली बणा फरक समजै छै न हर लुगाई की मनसा रै छै
जस्यांई वा मरै तो ऊंका लोग का कान्दा प जावै।
- तरक माण्डो