उपहार म दी सीख
एक सैर म एक राजो रै छो। वांको राजो बडो द्या हाळो छो। अर ऊ घणो लखणहाळो बी छो। वांका लोगदणी ई ऊ अपणी ओलाद क नाइ समझअ छो। अर लोगदणी बी ऊंकैतांई बाप की बर्याबर मान छा। पण ऊका सैर म एक गरीब मनख रै छो। ज्यो ऊंकी बराई करै छो। पण फेर बी रा
- ओर बांचो
- तरक माण्डो






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