एक बेटी ऊंका भाईजी सूं खैरी छै क, भाईजी म्हूं फोरी सूं लोठी कस्यां होगी।

भाईजी म्हूं छोटी सूं बड़ी कस्यां होगी ,भाईजी की आख्यां म मांई की हाता।

म थोड़ा दन ओर रैती तो कांई बगड़ जातो।

भाईजी म्हूं फोरी सूं लोठी कस्यां होगी…….(2)

ग्यो ऊ बचपणो ग्यो ऊ सपणो…

पराया होग्या व्ह सारा, व्ह अपणा…….

नन्‍नी सूं बच्‍ची म्हारी नन्‍ना सा झुळो थारो…

जा म्हूं छो मुण्डो खुल्यो थारो।

फेर कस्यां मनाबा को, गळा सूं लगाबा को…

दन अस्यांई रैता तो कांई बगड़ जातो

भाईजी म्हूं फोरी सूं लोठी कस्यां होगी…….(2)

कस्यां करूं बदा म्हूं थनै बच्यार करूं जब म्हूं अस्यां।

रै जाउं हाल रै, अस्या पण छोरी म्हारी थारैतांई जाणो तो होवैगो

थनै चायो जो ऊनै पाबो तो होवैगो

चला री छोरी अब कांई बच्यार करै…

गजरो न्ह बज्या रोतां-रोतां ।

भाईजी म्हूं फोरी सूं लोठी कस्यां होगी…….(2)

भाईजी की आंख्या म मांई की हाता।

म थोड़ा दन ओर रैती तो कांई बगड़ जातो

भाईजी म्हूं फोरी सूं लोठी कस्यां होगी।