छोरा-छोरी मारै छै मिसकोल

छोरा- छोरी घणा बगड़र्या ये तो मांरै छै मिस कोल

मांई- बाप क छानै-छानै छत प करले ये बातां....2

पढबो लिखबो गयो भाड़ म काळी कर ले रातां.... 2

दे हात को झालो ये जारी सीटी मोल.......2

छोरा- छोरी घणा बगड़र्या ये तो मांरै छै मिस कोल....॥

नणद बाई होग्या जी मोट्‍यार

ईं गीत म कवि बतार्यो छै क एक लुगाई ऊंका लोग सूं अपणी नणद का बारा म

कांई खैरी छै भाभी।

ये… ये… ये… नणद बाई बर हेरो न बा होग्या जी मोट्यार बलम यांकै हिसाब………2

थांका दोन्यु जोडु हात बाई क बर हेरो न

बर हेरो जी न चोखो सो यांकै घर हेरो न ….2

नीलो लैंगो छोरी

ईं गीत म एक कवि एक बना ब्याइ छोरी जो होडोती नीली पोसाक पैन्या छै वा

कस्सी लागै छै ईंका बारा म गार्यो छै।

नीला लैंगा छोरी थारै दादर मोर ............ 2

मण्डर्या दादर मोररी आजा आजा गणगोर

नीला लैंगा म छोरी थारै दादर मोर ............ 2

अब मनमोहन बण जाऊं जी

एक छोटी बात म्हूं थांकैतांई बताऊं एक महाभारत काल का मुखया छा श्री करसन भगवान

ज्यांको भी नाम मनमोहन छो अर एक आपणा प्रधानमन्तरी ज्यांको भी नाम मनमोहन

छै। यां दोन्या म फरक बताबो छाऊं छूं। म्हारो खैबा को मतलब छै क आपणा

देस का सेवा म मोन धारण करैर न्ह बैठै।

बजारा (लेवो) म क्यो झांकोजी बालम

ये ये ये ओजी ते सरे बजारां, ओजी थें बीच बजारा क्यों झांकोजी ओडा-डोडा

थें बालम जी ओडा डोडा….......2

जी थग्यो थांको गोडो.......... 2

थे बीच बजारा मत झांकोजी बालम ओडा- डोडा थें सरे

बजारा........... 2

क्यों घर की खांड खरकरी लागी पैलां को गुड़ मीठो.…....2

लुगाई को सण्‍गार

गोरी थारा हाता म परादेऊं चुड़्‍या हरी-हरी……………(2)

म्हूं डोलु तू लटका म्हारी, म्हूं मचलुं तू लेला म्हारी अर तू क्यों रवे डरी डरी,(2)
कगोरी थारा हाता म परादेऊं चुड़्‍या हरी-हरी।

जोधपुरी लैंगो मंगवा देऊ जेपर की थारै चुनर ला देऊं…(2)

कर सोळा सण्‍गार सजा देऊं …….(2)

मारैतांई मेळो दखाद्‍यो

ई भजन म कवि या बात बतार्यो छै क मेळो लुगायां क लेकै

देखबो जादा बड़्‍या कोइनै यो भजन याई बात बतार्यो छै। एक लुगाई

ऊंका लोग सूं खै छै क एजी म्हानै मेळो दखाद्‍यो जी, ये म्हानै मेळो बताद्‍यो

जी ऐजी म्हारा पप्पु का पापा थां म्हानै मेळो बताद्‍यो जी।

34. राम न जप लै

बोलो रामचन्दर भगवान की जे हो।

एक बाबाजी, कै छै क जवानी डळगी अर बुढापो आग्यो।
अब तो राम को नाम ले लै। रामजी को नाम ले लै आडो आवैगो।

आडो आवै गो रै आडो आवैगो

थारो डील को गुलाबी रंग उड जावैगो।

रामजी को नाम ले लै आडो आवैगो॥

मैन्त की ताकत

कोइ देस म एक सेठ रै छो। वांकै गोडै घणो पीसो छो। ऊंकै गोडै घणी बडी ज्याग घणी जमीं-जायदाद अर ऊंको बडो परवार छो। पण एक मसीबत छी ऊ सेठ न नीन्द नावछी, कदी-कदी थोड़ी झमक लाग जावछी। अर घणा खोटा सपणा आवैछा। सेठ घणी चन्ता म रैछो। उनै ऊंको घणो अलाज करायो। पण ऊंको रोग घटबा की बजाय बढतो ही जार्यो छो। एक दन ऊ

पटैल की च्यार ब्‍वां

एक गांऊ म एक पटैल जी रै छा। वांकै च्यार बेटा छा। च्यांरू को ब्याव होर्यो छो। एक दन पटैल जी न की जावो ब्वांवो आपणा माळ म जावो। अर चणा न नीन्‍दर आवो। च्यारु ब्‍वां माळ म चलगी। ब्वां न सोची ये चणा तो काटणी बी आपण न ई पड़ैगा। तो आपण तो अबार सूं ई काटबा लाग जावां। सब क आसै आगी। व्ह काल सूं ई चणा काटबा