भारत देस महान आपणो इन सब जग जाणै छै
अर यां प मान सबको इन बी सब मान छै॥
आज देस की हालत बगड़ी, घरणा करली नार्या सूं
गलत काम मनख करै छै, दोस लगावै नार्या सूं॥
बेटो जनम घणी खूसी होवै, बेण्ड बाजा बजावै छै।
बेटी जनम अर सूणले तो, सबका मुण्डा कमलाव छै॥
पालण पोसण म भेद घणो, बेटा ईं दूद पिलाव छै।
अर बेटी मांगै दूद तो, एक थाप लगावै छै॥
पढाई लिखाई बेटा की छावै, अर बेट्यां सूं काम करावै छै
कांई करैगी पढअर बेट्यां कांई मं समे गमाव छै॥
एक मास्टर का हाल सूणांऊ ऊंकी बेटी हुई बडी।
सादी जाक तह कर्याया, अब माटरणी क चन्ता होगी खड़ी॥
एक पड़ोसण सूं खबा लागी, घर भरग्या सामान घणा, लेकीन रांड
कुळ की लेर जनमी अर खाली करज्यागी गंऊ चणा
देज परथा कु परथा फैली अर ईंसू लोग घणा दुख पाग्या॥
अर दस बीस हजार सूं काम न चाल, अर लाखा देर भी दुख
पाग्या।
फेर भी कलुज भरी तजोरी अर आलमारी साथ म हो अर आबा
हाळा की खातर छोकी, अर दारू बना बात भी न होवै॥
देस क तांई कुन कर्यो खराब अर अण्डा म्छली सराब।
लाब बड़ा अर खरचा मांमुली अर प्याज टमाटर, गाजर मुळी, ठूंस ठूंस
कर गोदाम भरद्या अर बे मोसम बेमोत इ मरना। सो लोगो की एक
गवा अर सूंबे स्याम की साफ हवा।
- तरक माण्डो