बादळी सावण की बरसअरी जोरदार
मनड़ो तो थांकी यादा मअ लागअ रअ…….2
समळअ नअ समाळ्यो झूमर-झूम कर नाचअ।
मनड़ो म्हारो बणर मोरियो मोरणी पुकारअ॥
अब जोई तो नअ जावअ थांकी बाट………।
मनड़ो तो थांकी यादां मअ लागअ रअ।
टप-टप करकअ पड़अ बादळी मन का तार बजावअ।
उडअ हलोळा जी हिवड़ा मअ आर गीत सूणावअ॥
अब सावण्यो मन मअ लगावअ आग………।
मनड़ो तो थांकी यादा मअ लागरअ।
बागा का खिलग्या फूलड़ा मन मअ फूल नअ खिलर्या।
दन-रात थांकी होल्यू आरी मलबा क्यूं नअ आर्या॥
पिया सुद तो लेल्यो म्हारी आर…………।
मनड़ो तो थांकी यादा मअ लागरअ।
कोयल कू के पपीहा बोले मन मअ आग लगावअ।
सावण का झूला नअ देख्या थांकी याद सतावअ॥
पिया मलबा तो आवोजी एक बार……………।
मनड़ो तो थांकी यादा मअ लागरअ।
बादळी सावण की बरसअरी जोरदार
मनड़ो तो थांकी यादा मअ लागअ रअ…………2
- तरक माण्डो