घर की सान बेटी

नाऊ करअगी रोसन बेटी।
ईं कमजोर नअ मानो थां॥
लेकर जनम आई थांकअ।
किसमत ईं मानो थां॥

सान बढाती घर की तू।
खुसियां मनमान देती तू॥
एक कुल की सान कोइनअ तू।
दो-दो कुल को नाऊ बढाती तू॥

सती सावितरि सीता छअ तू।
बन दूरगा पाप्यां नअ मारती तू॥
वीणा धारण करअर हंस वाहिनी तू।
कदी कमल वासिनी कअलाती तू॥

कमजोर कदी नअ होवअ तू।
नाऊ रोसन कुल को करती तू॥
कोइकी बेटी कोइकी माई छअ तू।
बणर बेटी नाऊ कमावअ तू॥

पढ लिखकर आज घरां कोइनअ।
आसमान नअ छूती तू॥
बोज मत समजो बेट्‍या नअ।
घरकी खुसाली होवअ छअ तू॥