म्हनअ अस्या मल्यारी भरतार नतके दारू पीवअ री
म्हनअ अस्या मल्यारी भरतार नतके दारू पीवरि री।
म्हनअ दारूड़्यो मल्योरी भरतार नतके दारू पीवअ री॥
दारू पीवअ री, भांग खावअ री।
म्हनअ नसीलो मल्योरअ भरतार नतके दारू पीवअरी॥
दन उगतांई यो जावरी ठेका पअ रम को री क्वाटर ले आवअ।
गटक-गटक यो पीवअ दारू तंगा पअ यो तंगा खावअ॥
चढ जावअ दारू जादा तंगा खातो घरनअ आवअ।
यो राड़ा लावारी हर बार नतके नसो करअ॥
काम करअ नअ कोड्यां को खअतांई उल्टो रोप जमावअ।
बातां कर मोबाईल सूं बेलेंस उडावअ।
चलमा गांजा लगावअ री लार रोज को नसो करअ।
म्हारी नअ मानअ री भरतार नतके ………………॥
आया ग्या की कदर नअ समजअ उल्टो ई सो जमावअ।
घर पअ नूण मरच्या सब बित्या सरम इनअ नअ आवअ॥
म्हारी कस्यां तो पड़गी पार नतके नसो करअ।
म्हनअ अस्या मल्यारी भरतार नतके………………॥
छोको देख्यो खानदान जी जद म्हूं ईं परणाई।
घर की सन्दी चीजां म्हारा डाईजा मअ लाई॥
इनअ म्हारी तो मटारी तार बार नतके नसो करअ।
म्हनअ नसिलो मल्यो री भरतार नतके दारू पीवअ॥
- तरक माण्डो